justice for free(न्याय सबके लिय मुफ्त मे)


  1. Justice for free विधिक सेवा कार्यक्रम क्यों कैसे और किसके लिए ।

आज के जमाने मे भी हमारे आस पास कई सारे ऐसे केस मिलेंगे जिस मे वादी के पास पैसे के अभाव मे न्याय नही मिल पाता ।।तो कृप्या आज इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आस पास के लोगो को भी बताय की न्याय मुफ्त मे भी मिल सकता है।।

जी हैं आज बात करेंगे विधिक सेवा कार्यक्रम क्या है और किसके लिए है और क्यों है ।।

विधिक का  गरिमा न्याय से है। त्वरित एवं सस्ता न्याय सुनिश्चित किया जाना  उद्देश्य है ।

न्याय प्रणाली के समक्ष सबसे बड़ी समस्या एवं चुनौती इस उद्देश्य को पाना है। जहां एक ओर गरीब दलित लोगों का पहुंच न्यायालय तक आसानी से नहीं हो पाती। जिससे उन्हें सामाजिक न्याय नहीं पहुंच पाती ।वहीं दूसरी ओर न्यायालय में लंबित वादों की संख्या प्रत्येक वर्ष भारी मात्रा में वृद्धि होने के कारण न्याय प्रणाली के द्वारा शीघ्र एवं सस्ता न्याय उपलब्ध कराने की समस्या और अधिक चिंताजनक होती जा रही है ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39( क) के नीति निदेशक सिद्धांत द्वारा यह प्रावधान किया गया है। जिसमें राज्य यह दायित्व  सुनिश्चित करें कि विधि तंत्र इस प्रकार काम करें जिससे समान अवसर के आधार पर न्याय सुलभ हो और कोई भी व्यक्ति आर्थिक या किसी अन्य निरयोक्ता के कारण न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित ना रहे। अनुच्छेद 39 (क) के द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि उपायुक्त विधान या योजना द्वारा सामाजिक न्याय को प्राप्त करने हेतु निशुल्क विधिक सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।।

विधिक सेवाएं क्या है 
1-समस्त न्यायालयों/ प्राधिकरणों/ अधिकरण /आयोग /के समक्ष विचाराधीन मामलों में विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है ।।
गरीब तथा आम व्यक्तियों के लिए न्याय शुल्क ,सहित वकील की फीस ,एवं अन्य सभी आवश्यक वाद व्यय प्राधिकार द्वारा वहन किए जाते हैं ।।परामर्श एवं सुलभ समझौता केंद्रों में संधिकर्ता दल द्वारा पारिवारिक विवादों को सुलह, समझौते के आधार पर समाप्त कराए जाने के सतत प्रयास किए जाते हैं ।

मोटर दुर्घटना प्रतिकार वादों में पीड़ित व्यक्तियों को शीघ्र न्याय दिलाया जाता है ।

विधिक सेवाएं प्रदान करना


 समाज के वैसे कमजोर एवं निर्बल वर्ग के व्यक्तियों को निशुल्क विधिक सेवाएं उपलब्ध कराना इस प्राधिकार का मुख्य उद्देश्य है इसका संक्षिप्त विवरण हम नीचे इस प्रकार से दे रहे हैं।।
1 विधिक सेवाएं प्राप्त करने हेतु पात्रता कोई भी ऐसा व्यक्ति निशुल्क विधिक सेवाएं प्राप्त करने का अधिकारी है जिसकी समस्त स्त्रोतों से वार्षिक आय ₹50000 तक है ।
इसके अतिरिक्त निम्न श्रेणी के सभी व्यक्ति निशुल्क विधिक सेवाएं प्राप्त करने के अधिकारी हैं। और उनके लिए वार्षिक आय की कोई सीमा नहीं है ।
2अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य 
3 मानसिक रूप से अस्वस्थ या अन्यथा असमर्थ ।अनुपेछीत प्रभाव जैसे बहू विनाश, जातीय हिंसा, जाति अत्याचार ,बाढ़ ,सूखा, भूकंप, औद्योगिक विनाश ,की दशाओं से पीड़ित व्यक्ति 

4 कोई भी औद्योगिक कर्मकार


5किसी भी महिला और बालक
 किन मामलों में विधिक सेवा प्रदान नहीं की जाएगी।।


 न्यायालय की अवमानना के मामले में, निर्वाचन से, संबंधित कार्रवाई में ,मानव का व्यापार के प्रीत के सिवाय अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956 के अधीन कार्यवाही में ।।


विधिक सेवा कैसे प्राप्त की जाए ।।
उच्च न्यायालय /दीवानी/ न्यायालय/ में विधिक सेवा प्राप्त करने के लिए कोई भी पात्र व्यक्ति सेवा प्राधिकार के सचिव को सादे कागज पर अथवा संकलन प्रारूप पर आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है।
 जिसमें मुकदमे से संबंधित संक्षिप्त विवरण दिया जाएगा और पात्रता के संबंध में समस्त स्त्रोतों से आय का प्रमाण पत्र अथवा जाति प्रमाण पत्र दिया जाएगा आय से संबंधित प्रमाण पत्र स्वयं के शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है। विधिक सेवा प्रदान की जाने वाले व्यक्ति का दायित्व

 प्रत्येक विधिक सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपने आवेदन पत्र में कोई भी तथ्य ना छिपाएं ।और जीला प्राधिकार न्यायालय विधिक सेवा समिति को पूर्ण सहयोग प्रदान करें। यदि विधिक सहायता प्राप्त व्यक्ति द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता था अधिवक्ता के साथ सहयोग नहीं किया जाता है तथा उसके द्वारा व्यक्तिगत तौर पर अपना वकील नियुक्त कर लिया जाता है तो उसे उपलब्ध कराई गई है कानूनी सहायता वापस ली जा सकती है।।


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